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दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय में ‘संवाद’ श्रृंखला में ज़कीया जुबैरी से बातचीत || संग्रहालय में होगा लन्दन की ज़किया ज़ुबैरी से ‘संवाद’ || वरिष्ठ साहित्यकार एवं स्वाधीनता सेनानी प्रो. अक्षय कुमार जैन का निधन || पाण्डुलिपि संग्रहालय में ‘आरम्भ: तीन’ तीन रचनाकार करेंगे रचनापाठ || ‘पूर्व पाठ’ में मां पर केन्द्रित कविताओं का पाठ ||
भोपाल के संग्रहालय
इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय
इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में मानव जाती किए विभिन्न रूपों को दर्शाया गया है ! यह लगभग 10000 Sq.M में फैला हुआ है यह भोपाल में स्थित है इस संग्रहालय में भारत के विभिन्न प्रान्तों का रहन सहन दर्शाया गया है
क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र
क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र NCSM का एक घटक है , विशेष रूप से छात्र और सामान्य रूप से जनता के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी को लोकप्रिय बनाने में लगी हुई है, इंटरैक्टिव प्रदर्शनियों, सेमिनारों के माध्यम से लोकप्रिय व्याख्यान, विज्ञान शिविरों और विज्ञानं के विभिन्न पह्लुयें से रूबरू करता है | यह ४००० वर्ग मी. में फैला है | यह १९९५ में स्थापित हुआ था |भोपाल स्टेशन से यह ०७ कि. मी.की दूरी पर है|
दूरसंचार संग्रहालय
दूरसंचार संग्रहालय का मुख्य उद्देश्य दूरसंचार नेटवर्क के विकास के साथ दर्शकों के परिचित कराने के लिए उनकी जिज्ञासा जगाना, उन्हें दूरसंचार के इतिहास के बारे में अधिक पता लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है| यह १९९६ में स्थापित किया गया | यह ४००० वर्ग फीट में फैला हुआ है यह भोपाल स्टेशन से ०५ कि. मी . | यहाँ स्टाफ मेम्बर ०४ से ०६ है |
माधव राव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय
भोपाल के लिंक रोड नंबर 3 पर 'माधव राव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय' एक महत्वपूर्ण संस्थान है. समाचार पत्रों की मत्वपूर्ण विरासत इस संग्रहालय में सहेजकर रखी गई है. इसके संस्थापक श्री विजयदत्त श्रीधर ने इसे देश ही नहीं, दुनिया के शोधार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया है.
दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय
दुष्यन्त कुमार ने हिन्दी ग़ज़ल को नई ऊँचाइयाँ दी हैं. यूँ तो दुष्यन्त कुमार के पहले भी अनेक वरिष्ठ रचनाकारों ने ग़ज़ल के तेवर बदले, लेकिन जिन प्रयोगों के कारण दुष्यन्त कुमार की ग़ज़लें आम लोगों से जुड़ गईं, उसका मुख्य कारण है ग़ज़लों में समकालीन परम्परा का निर्वाह. यूँ देखा जाय तो परम्परा-भंजक को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन जो इन चुनौतियों को स्वीकार करता है, वही कालजयी होता है. इन अर्थों में दुष्यन्त कुमार को कालजयी रचनाकार की संज्ञा दी जा सकती है. ऐसे कालजयी रचनाकार हमारे समय का दस्तावेज़ होते हैं, जिनका संग्रहण और संरक्षण आने वाले समय के लिए महत्वपूर्ण साबित होता है. दुष्यन्त कुमार जैसे समकालीन और सामाजिक परिवेश से जुड़े रचनाकार के नाम पर यदि एक पूरी विरासत को सहेजने का काम कहीं हो रहा हो, तो समाज में इसका स्वागत किया जाना चाहिये. आज कम्प्यूटर और इलेक्ट्राॅनिक मीडिया हमारे समाज पर पूरी तरह हावी हो गया है, ऐसे में यह और चिन्ताजनक है. आज कम्प्यूटर की ‘ई-संस्कृति’ ने एक ओर जहाँ एक-दूसरे को बिलकुल करीब ला दिया है, वहीं दूसरी ओर उसने हमें भावनात्मक रूप से बहुत दूर भी कर दिया है. यह हमारे तात्कालिक विकास के लिए सहायक तो हो सकता है, लेकिन इसके स्थायित्व के बारे में सन्देह के अनेक कारण और प्रमाण हमारे पास है. ताड़पत्र और भोजपत्र की सभ्यता सदियों बाद भी पूरी परम्परा के साथ जीवित है, लेकिन पाश्चात्य संस्कृति के किसी भी पहलू पर नज़र डालें तो एक-दो दशक से अधिक उसकी उम्र नहीं लगती. ऐसे में अपनी सनातन परम्परा की रक्षा हमारा दायित्व है. परम्परा को जीवित रखने के अनेक तरीके हो सकते हैं, जिनमें एक इस तरह की चीजों का संग्रहण और संरक्षण भी है, जो हमें अपने सामाजिक मूल्यों और मर्यादाओं से परिचित करा सके. स्व. दुष्यन्त कुमार के नाम पर दिसम्बर 1997 को भोपाल में नितान्त निजी प्रयासों से युवा सर्जक राजुरकर राज ने अपने परिवार और साहित्यिक मित्रों के सहयोग से ‘दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय’ की स्थापना की. इस विचार और प्रयास के पीछे मूल भावना यही थी कि हम उस रचनात्मक पीढ़ी की सर्जनात्मकता को जान सके, जिसने हमारे समाज को नई दिशा प्रदान की. संग्रहालय में उपलब्ध पाण्डुलिपियों को देखने से हमें यह अनुमान होता है कि रचनाकार ने किन परिस्थितियों में रचना की होगी. हम लेखक की हस्तलिखित रचना को देखकर उसकी रचनाप्रक्रिया को समझ सकते हैं. अमृतलाल नागर, फणीश्वरनाथ रेणु, भगवतीचरण वर्मा जैसे महान और कालजयी साहित्यमनीषियों की हस्तलिखित पाण्डुलिपियाँ देखना अपने-आप में एक सुखद अनुभव है. व्यंग्य को एक अलग ज़मीन पर खड़ा करने वाले शरद जोशी और हरिशंकर परसाई किस तरह के कागजों का उपयोग करते थे? अमृतलाल नागर के अक्षरों की बनावट क्या थी? गिरिजा कुमार माथुर की कविता की बुनावट किस तरह होती थी? इन सारे सवालों के जवाब हमें इन पाण्डुलिपियों को देखने के बाद सहज ही मिल जाते हैं. दुष्यन्त कुमार जिन ग़ज़लों के कारण सारे देश में और देश की सीमाओं के बाहर भी जाने जाते हैं, वे ग़ज़लें मूल रूप में किस तरह हैं, यह उनकी पाण्डुलिपि देखकर पता चलता है. आज हम उनका छपा हुआ संग्रह ‘साये में धूप’ इस मूल पाण्डुलिपि के साथ मिलाकर देखते हैं, तो पता चलता है कि रचनाकार ने समय और सन्दर्भांे के साथ रचनाओं में आवश्यक फेरबदल कई बार किया है. इस संग्रहालय में एक ओर जहाँ दुष्यन्त कुमार का कोट, कलाई घड़ी और प्रख्यात व्यंग्यकार शरद जोशी का चश्मा सुरक्षित है, वहीं आॅडियो कैसेट में मैथिलीशरण गुप्त, सुमित्रानन्दन पन्त, रामधारी सिंह दिनकर, दादा माखनलाल चतुर्वेदी, भवानीप्रसाद मिश्र, शरद जोशी जैसे साहित्य मनीषियों की आवाजें अपने समय का साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं. सच कहा जाय तो इन चीज़ों को नजदीक से देखने में जो आनन्द मिलता है, उसे शब्द दे पाना बहुत सहज नहीं है. ढाई सौ वर्ष पुरानी पाण्डुलिपि से लेकर आधुनिक काल के साहित्यकारों तक की हस्तलिखित सामग्री इस संग्रहालय में उपलब्ध है. वहीं माखनलाल चतुर्वेदी, भवानी प्रसाद मिश्र, सुमित्रानन्दन पन्त, रामधारी सिंह दिनकर, मैथिलीशरण गुप्त जैसे कालजयी रचनाकारों की कविताएँ उन्हीं की आवाज़ में सुनी जा सकती हैं. इस संग्रहालय द्वारा केवल पाण्डुलिपियों और सामग्री का संग्रह ही नहीं किया जा रहा है, बल्कि रचनात्मक सक्रियता को रेखांकित करने के लिए ‘दुष्यन्त कुमार’ के नाम पर प्रति वर्ष अलंकरण भी प्रदान किया जाता है. इसके अलावा आंचलिक रचनाकार सम्मान और सुदीर्घ साहित्य साधना सम्मान भी उल्लेखनीय हैं. देश भर के साहित्यकारों की डायरेक्ट्री ‘शब्दसाधक’ का प्रकाशन भी एक महत्वूपर्ण प्रयास है. संग्रहालय की अपनी एक वेबसाइट ूूूण्कींतवींतण्दमज भी है, जिसमें इस संग्रहालय के अलावा भोपाल के अन्य संग्रहालयों के बारे में भी जानकारी दी गई. इस पर साहित्यकारों की डायरेक्ट्री, परिचय, पत्रिका कोष, साहित्यकारों के ताज़ा समाचार आदि विश्ेाष उल्लेखनीय है। इसके अलावा भोपाल में हो रहे आयोजनों के बारे में भी जानकारी अपलोड की जाती, जिससे आयोजनों में शामिल होने और आयोजनों की रूपरेखा बनाने में मदद मिलती है। साहित्यकारों, कलाकारों, पत्रकारों और संस्कृतिकर्मियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपना परिचय ‘लेखक परिचय’ में जोड़कर साइट को समृद्ध और उपयोगी बनाने में मदद करें। अपने सीमित संसाधनों में भी संग्रहालय निरन्तर रचनात्मक कार्य कर रहा है. दिसम्बर 1997 से सात वर्षों तक राजुरकर राज के निजी आवास मंें चलने के बाद 2005 में मध्यप्रदेश शासन ने इसे महत्वूपर्ण काम मानते हुए दक्षिण तात्या टोपे नगर में प्लेटिनम प्लाज़ा के पास शासकीय आवास प्रदान किया है, जहाँ संग्रहालय देखने के लिए लोग निरन्तर आ रहे हैं. भारतीय साहित्यकारों के साथ ही विदेश में बसे साहित्यकार भी इसका अवलोकन कर चुके हैं, जिनमें चर्चित लेखिका तसलीमा नसरीन, माॅरीशस के श्री अभिमन्यु अनत श्री रामदेव धुरंधर एवं बीरसेन जागासिंग (माॅरीशस), डाॅ. तोमियो मिज़ोकामी (जापान), अनिल जनविजय (मास्को) डाॅ. कृष्ण कुमार (लन्दन), डाॅ. देवंेन्द्र सिंह (यू एस ए), देवी नागरानी आदि प्रमुख हैं. संग्रहालय की स्थायी समिति के अध्यक्ष श्री कमलेश्वर के निधन के बाद सर्वप्रथम उनके नाम पर ‘कमलेश्वर पुस्तक केन्द्र’ और ‘कमलेश्वर स्मारक व्याख्यानमाला’ भी संग्रहालय का महत्वपूर्ण प्रयास है. संग्रहालय में एक पुस्तकालय भी है, जिसका निरन्तर विस्तार किया जा रहा है। एनएचडीसी लिमिटेड के सहयोग से संग्रहालय में एक वातानुकूलित सभाकक्ष बनवाया गया है, जहाँ निरन्तर साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजन होते रहते हैं। उपलब्धियाँ मार्गों का नामकरण: संग्रहालय ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ भी हासिल की हैं। 1998 में भोपाल में ‘दुष्यन्त कुमार मार्ग’ और 2005 में ‘शरद जोशी मार्ग’ के नामकरण का श्रेय संग्रहालय को ही है. भित्ती पत्रिका ‘बयान’ ः नवम्बर 2007 से संग्रहालय परिसर में सड़क की ओर 14 फुट ऊँचे और 6 फुट चैड़े एक होर्डिंग पर प्रतिमाह एक कविता प्रस्तुत की जाती है। इसकी मुख्य विशेषता है कि यह कविता संग्रहालय में मूल हस्तलिखित रूप में या उसकी मूल आवाज़ में रिकाॅर्डिंग सुरक्षित होती है। बुके नहीं, बुक दें: संग्रहालय ने अपनी अभिनव परम्परा में एक और आयाम जोड़ा है। पुस्तक संस्कृति के विकास के लिए आयोजनों और समारोहों में अतिथियों का स्वागत फूलमाला अथवा गुलदस्ते से न करके ‘पुस्तक और फूल’ भेंट कर किया जाता है। संग्रहालय निरन्तर गतिशील है. इसकी प्रगति को देखकर उम्मीद है कि आने वाले समय में यह शोध और अध्ययन का महत्वपूर्ण केन्द्र बन सकेगा. एनलाल जैन अध्यक्ष, कार्यकारी परिषद दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय एफ-50/17, दक्षिण तात्या टोपे नगर, शरद जोशी मार्ग, भोपाल-462003 दूरभाष: 0755 2775129
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